ग़ज़ल – नजरें तुम्हारी गलत हैं
नजरें तुम्हारी गलत हैं और पहनावा मेरा गलत बताते हो, करते हो गुनाह तुम और गुनाह का दोषी मुझे ठहराते
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Read Moreम्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान एक ऐसा संगठन जिसके नाम से ही संस्कृति के प्रति विशेष लगाव की झलक आ रही
Read Moreरक्तदान जीवनदान है, आपके द्वारा दिया गया रक्त कई जिंदगियों को बचा जाता है। रक्तदान की असली अहमियत का हमें
Read Moreझोली करकै मांगा मोदी जी नाटिये मत ना, पूरी सुन लिये बीच में बात काटिये मत ना। कड़वी दवाई प्याई
Read Moreउस रावण जैसी मर्यादा नहीं रखते आज के रावण, कानून क्या, ईश्वर से भी नहीं डरते आज के रावण। मारीच
Read Moreसंस्कार कहाँ से मिलेंगे आज जब नहीं रहे सयुंक्त परिवार, दादा दादी का नहीं मिलता बच्चों को वो कहानी रूपी
Read Moreमन में उमड़ते हुए ख्यालों को, देख जमीं पर पड़े निवालों को, कलम अपने आप चल पड़ी। निवालों को देख
Read Moreतुम मुझे बुलाओ, मैं तुम्हें बुलाऊँ, समारोह को सबसे ऊंचा दिखाऊँ। खिंचवाकर दो चार फ़ोटो हमारे, जोर शोर से अखबार
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