परंपराओं की संवाहक मातृशक्तियाँ
भारतीय परंपरा और संस्कारों की प्रतीकता, जिसकी संवाहक बनती हमारी मातृशक्तियाँ। यह हमारा आपका सौभाग्य है कि हमारे अपने जीवन में हमसे ज्यादा मातृशक्तियों
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Read Moreलोग कहते हैं तो कहने दोवो तो कहेंगे ही,बस! आप ध्यान मत दो, उनको कहने दो,क्योंकि लोगों का काम ही
Read Moreसोचता हूँ कुछ ऐसा लिखूँकि अमर हो जाऊँ।मरना तो एक दिन हमको भी हैतो क्यों न मरने का इतिहास लिख
Read Moreराष्ट्र प्रथम सिर्फ शब्द नहींभाव है, संवेदना है, समर्पण हैसिद्धांत, संकल्प, दृढ़ता, अनुशासन है।यह दो शब्द कहने के लिए तो
Read Moreलोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर संसद का मज़ाक़ बन रहा है,सदन में चर्चा-परिचर्चा, विमर्श के बजाय विरोध की आड़ में सड़क पर
Read Moreजंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन की आड़ मेंक्या कुछ नहीं हो रहा है,सत्ता की राजनीतिक रोटियां सेंकी जा रही हैंसंवैधानिक पदों
Read Moreस्वार्थ की भी अपनी दुनिया अपना सिद्धांत है आज जिसके पास स्वार्थ का हथियार नहीं है आज की दुनिया में वो बिल्कुल
Read Moreपहली वारिश और ये हालहर ओर सुनाई पड़ रहा त्राहि मामबेचारा यमराज है परेशानलोग उसे बेवजह कर रहे बदनाम।सुनकर उसे
Read Moreमेरे शब्द, सिर्फ मेरे हैंजिस पर सिर्फ मेरा अधिकार है मेरा विचार, मेरा दृष्टिकोण, मेरा चिंतन है,किसे अच्छा लगता है और
Read Moreकहने को तो आज मेरा जन्म दिन हैमगर इसमें ऐसा क्या खासउल्टा एक एक सेकेंड, मिनट, घंटे, महीने दिन के
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