कविता

इंसान की तलाश

भटक रहा हूँ 

गली गली 

मोहल्लों में 

ढूंढ रहा कोई ऐसा घर 

रहता हो न जिसमें 

कोई हिन्दू 

कोई मुस्लिम 

कोई सिख़ 

कोई ईसाई 

बस रहता हो 

कोई एक अदद 

इंसान

*ब्रजेश गुप्ता

मैं भारतीय स्टेट बैंक ,आगरा के प्रशासनिक कार्यालय से प्रबंधक के रूप में 2015 में रिटायर्ड हुआ हूं वर्तमान में पुष्पांजलि गार्डेनिया, सिकंदरा में रिटायर्ड जीवन व्यतीत कर रहा है कुछ माह से मैं अपने विचारों का संकलन कर रहा हूं M- 9917474020