गीत/नवगीत

कुछ मस्ती भी तो जरूरी है

जहाँ चाहो तुम, रहो वहाँ पर, साथ की, ना मजबूरी है।
स्वस्थ रहो, और व्यस्त रहो, कुछ मस्ती भी तो जरूरी है।।
पढ़ी-लिखी अब समझदार हो।
खतरों से भी, खबरदार हो।
अपने पैरों खड़ी हुई हो,
समझती खुद को असरदार हो।
इच्छा अपनी, मर चुकी सारी, तुम्हारी, न रहें, अधूरी है।
स्वस्थ रहो, और व्यस्त रहो, कुछ मस्ती भी तो जरूरी है।।
मजबूरी में साथ न आओ।
जो चाहो, वह गाना गाओ।
साथ हमारे रस न मिलेगा,
जाओ प्यारी, जीवन रस पाओ।
जीवन फसल, लुट गई सारी, बाकी अब, बस तूरी है।
स्वस्थ रहो, और व्यस्त रहो, कुछ मस्ती भी तो जरूरी है।।
रूप, रस, गंध, स्पर्ष नहीं है।
पाने की भी, अब, चाह नही है।
चाहत तुम्हारी, रहीं अधूरी,
तुम्हारे दिल की थाह नहीं है।
नहीं जरूरत, तुम्हें हमारी, तुम्हारी दुनिया, पूरी है।
स्वस्थ रहो, और व्यस्त रहो, कुछ मस्ती भी तो जरूरी है।।

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)

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