लघुकथा

आबाद हो गया गांव

लगभग सौ घर वाले गांव में अब गिने चुने घर ही आबाद थे।वो भी शायद इसलिए कि उनकी अपनी मजबूरियां थीं। लेकिन जो लोग अपना घर छोड़कर शहरों में जा बसे थे, वे जब साल दो साल में घर आते तो अपने घर में बैठ भी नहीं पाते थे। क्योंकि देखभाल के अभाव में घरों की दशा दुर्दशा में बदल चुकी थी। यह बात इसी साल एम बीए पास लखन को कचोट रही थी। उसने इसी वर्ष होने वाले पंचायत चुनाव में भाग लेने का फैसला किया। घर वालों के विरोध के बावजूद उसने नामांकन किया और अंततः गांव का प्रधान चुना लिया गया। फिर तो वो गांव में ही आकर रहने लगा। गांव के लोगों ने उसका साथ दिया और उसने शासन की विभिन्न योजनाओं को प्रशासन के सहयोग से गांव का कायाकल्प करना शुरू कर दिया। सबसे पहले उसने प्राथमिक विद्यालय के भवन की मरम्मत कराकर रंग रोगन कराया। शिक्षकों की संख्या बढ़ाई और अन्य सुविधाओं से सुसज्जित कराया। बच्चों की संख्या भी अब बढ़ने लगी।विद्यालय प्रांगण में रंग बिरंगे फूल और फलदार वृक्ष लगवाए। आंगनबाड़ी केंद्र का फिर से संचालन शुरू कराया। विद्यालय प्रांगण।गांव के सचिवालय का सुचारू संचालन शुरू कराया। अस्पताल स्वीकृति कराया गांव में बिजली पानी नाली की मूलभूत आवश्यकताओं को उपलब्ध कराया। गांव के दो तालाबों का सौंदर्यीकरण कराकर पार्क जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई। जनसेवा केंद्र के लिए भी प्रक्रिया पूरी कराई। बच्चों के खेलने के लिए पार्क बनवाए। उसके श्रम, समर्पण को देखते हुए शहर जा चुके कई लोगों ने अपने अपने परिवार गांव में छोड़ने का विचार किया, तो कुछ लोगों ने सेवानिवृति के बाद गांव वापस आकर शेष जीवन गांव में आकर अपने पैतृक घर में बिताने का संकल्प लिया और अपने अपने स्तर से लखन के प्रयासों में विभिन्न स्तरों पर सहयोग करने के साथ ही उसका देना शुरू कर दिया। महज एक पंच वर्षीय कार्य काल में लखन का गांव पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया। प्रदेश सरकार ने लखन के गांव के लिए अलग से बजट स्वीकृति करने की संस्तुति कर दी। सांसद विधायक और जिला पंचायत निधि से अनेक योजनाओं पर काम शुरू हो गया। साथ ही उसे पंचायतों के विकास के लिए सुझाव देने का प्रस्ताव भी लखन को मिला। आज लखन के पिता को बेटे पर गर्व हो रहा था । उन्होंने सेवानिवृत्त के बाद खुद भी गांव में ही आकर रहने के लिए आश्वस्त किया। आज लगभग वीरान हो चुका लखन का गांव फिर से हर भरा और आबाद हो गया।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921

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