कविता

मां मुझे फिर फिर गोद में अपनी सुला लो…

मां मुझे फिर फिर गोद में अपनी सुला लो
प्यार से सर हाथ फेरो और बला लो।
डर मुझे लगने लगा है इस जहां से
कह के लल्ला अपनें आंचल में छुपा लो॥

तेरा वो झीना सा आंचल, बनके मेरी ढाल मां।
टालता था हर बला को, दूर वो हर हाल मां॥
फिर परेशानी नें घेरा है बचा लो…
कह के लल्ला अपनें आंचल में छुपा लो…

मेरी गलती हर शरारत को छुपाकर।
तुमने रखा सबकी नजरों से बचाकर॥
फिर जमाना पीछे है, मुझको सम्हालो…
कह के लल्ला अपनें आंचल में छुपा लो..

ठोकरें खा कर गिरा, जब भी धरा पर।
हौसला मुझको दिया, तुमने उठाकर॥
फिर मुसीबत के भंवर में हूं निकालो..
कह के लल्ला अपनें आंचल में छुपा लो…

मैं तेरा चंदा, तेरी आंखों का तारा।
ढूढता हूं मां मेरा, बचपन वो प्यारा॥
आके बस एक बार सीने से लगा लो…
कह के लल्ला अपनें आंचल में छुपा लो…

सतीश बंसल

*सतीश बंसल

पिता का नाम : श्री श्री निवास बंसल जन्म स्थान : ग्राम- घिटौरा, जिला - बागपत (उत्तर प्रदेश) वर्तमान निवास : पंडितवाडी, देहरादून फोन : 09368463261 जन्म तिथि : 02-09-1968 : B.A 1990 CCS University Meerut (UP) लेखन : हिन्दी कविता एवं गीत प्रकाशित पुस्तकें : " गुनगुनांने लगीं खामोशियां" "चलो गुनगुनाएँ" , "कवि नही हूँ मैं", "संस्कार के दीप" एवं "रोशनी के लिए" विषय : सभी सामाजिक, राजनैतिक, सामयिक, बेटी बचाव, गौ हत्या, प्रकृति, पारिवारिक रिश्ते , आध्यात्मिक, देश भक्ति, वीर रस एवं प्रेम गीत.