गीत/नवगीतपद्य साहित्य

नहीं चाहिए, दुआ किसी की

नहीं चाहिए, दुआ किसी की, नहीं देवी का मान है।
जन्मने दो,  शिक्षित होने दो,  नारी के अरमान हैं।।

सहायता नहीं, सहयोग चाहिए।
नहीं कोई,  हमें आन चाहिए।
पथ अपना हम, खुद चुन लेंगी,
नहीं कोई, व्यवधान  चाहिए।
हमको क्या सुरक्षा दोगे? खतरों में तुम्हारी जान है।
जन्मने दो,  शिक्षित होने दो,  नारी के अरमान हैं।।

सुरक्षा के नाम, हमें ना बाँधो।
षड्यंत्रों से, हित  ना साधो।
शिक्षा, चिकित्सा, रक्षा हम करें,
घर में बैठो, माटी  के माधो।
घरवाली बन, घर था, चलाया, बढ़ायें देश की शान है।
जन्मने दो,  शिक्षित होने दो,  नारी के अरमान हैं।।

देवी की पूजा, नाटक करते।
प्राण हमारे, गर्भ में  हरते।
जन्मने दो, ना पाप करो नर,
हमसे क्यों? तुम इतना डरते।
हाथ थाम, मिल साथ चलें, गायें विकास के गान हैं।
जन्मने दो,  शिक्षित होने दो,  नारी के अरमान हैं।।

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)