मुश्किल सी यह ज़िंदगी
मुश्किल सी यह ज़िंदगी, अनसुलझे से काज।
कटने से कटती नहीं, बोझ बनी है आज।।
दिन उलझन में बीत के, करता भीतर घात।
चिंता करबट ले रही, नींद नहीं है रात।।
सत्य झूठ के बीच में, खोज रही है ज्ञान।
मुश्किल सी यह ज़िंदगी, कैसे करें निदान।।
किस को अपना मान लें,किस पर हो विश्वास।
ढूंढ रही है ज़िंदगी, कौन यहां है खास।।
करते सब परिहास हैं, मानव की यह जात।
मन की मन में रह गई, किस से करिये बात।।
दिल को छननी कर रहे, चुभें तीर से बैन।
नफरत में अब प्रेम को, तरस रहे हैं नैन।।
मुश्किल सी यह ज़िंदगी, कौन निभाए साथ।
अपना बन के मीत अब, कौन थाम ले हाथ।।
रख भरोसा राम का, वह है तारन हार।
मुश्किल सी ‘शिव’ ज़िंदगी, होगी भव से पार।।
— शिव सन्याल
