गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दिल की यूं मिल्कियत हमारी है।।
बादशाहत मगर तुम्हारी है ।।

आज तक कोई आप-सा न मिला ,
आप की बात सबसे न्यारी है ।।

क्या हुआ सच बता छुपा मत यूं,
आज आवाज़ तेरी भारी है ।।

बात कहकर जो मुस्कुराते हो ,
सबसे प्यारी अदा तुम्हारी है ।।

आप होते हैं कब गलत साहिब ,
सारी गलती तो बस हमारी है ।।

झूठ की सौ दलील के ऊपर,
सत्य का इक बयान भारी है ।।

गा रहा है न जाने कौन नितान्त,
ये यकीनन ग़ज़ल हमारी है ।।

— समीर द्विवेदी नितान्त

समीर द्विवेदी नितान्त

कन्नौज, उत्तर प्रदेश

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