कविता

बसो मेरे नयनों में तुम श्याम

विधा- कविता
शीर्षक- बसो मेरे नयनों में तुम श्याम

मेरे मुरलीधर घनश्याम,
बसो मेरे नयनों में तुम श्याम,
नमन करूं मैं लेऊं बलैयां,
छवि तुम्हारी अनूप अभिराम।

मोरमुकुट मस्तक पर सोहे,
कानों में मकराकृत कुंडल,
कौस्तुभ मणि वनमाल कंठ में,
काले-घुंघराले तेरे मनहर कुंतल।

तेरी शरण में आई भगवन,
देवकी के सुत, वसुदेव नंदन,
जन्म दियो देवकी-वसुदेव ने,
कहलाए यशोदा-सुत, हे नंदनंदन।

धेनु चरैया, बंसी बजैया,
रास रचैया, लाज बचैया,
हे कृपासिंधु हे करुणाकर,
भक्तन के प्रभु पार-लगैया।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

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