बसो मेरे नयनों में तुम श्याम
विधा- कविता
शीर्षक- बसो मेरे नयनों में तुम श्याम
मेरे मुरलीधर घनश्याम,
बसो मेरे नयनों में तुम श्याम,
नमन करूं मैं लेऊं बलैयां,
छवि तुम्हारी अनूप अभिराम।
मोरमुकुट मस्तक पर सोहे,
कानों में मकराकृत कुंडल,
कौस्तुभ मणि वनमाल कंठ में,
काले-घुंघराले तेरे मनहर कुंतल।
तेरी शरण में आई भगवन,
देवकी के सुत, वसुदेव नंदन,
जन्म दियो देवकी-वसुदेव ने,
कहलाए यशोदा-सुत, हे नंदनंदन।
धेनु चरैया, बंसी बजैया,
रास रचैया, लाज बचैया,
हे कृपासिंधु हे करुणाकर,
भक्तन के प्रभु पार-लगैया।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
