शिक्षक : जीवन के प्रकाश
शिक्षक जीवन के मंत्र हैं,
शिक्षक जीवन के तंत्र हैं,
अज्ञान के अँधियारे में
ज्ञान का पहला दीपक हैं।
शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाते,
वे जीवन पढ़ना सिखाते हैं,
गिरने पर उठना सिखाते हैं,
मुश्किल राहों पर
आगे बढ़ना सिखाते हैं।
उँगली पकड़कर चलना सिखाते,
अक्षरों से परिचय कराते,
शब्दों को अर्थ देते हैं,
सपनों को पंख देते हैं।
वे राह भी हैं,
और राह दिखाने वाले भी;
वे दिशा भी हैं,
और मंज़िल तक पहुँचाने वाले भी।
कक्षा की चार दीवारों से निकलकर
शिक्षक हमें संसार समझाते हैं,
कला हो या विज्ञान,
प्रौद्योगिकी हो या साहित्य,
ज्ञान के हर द्वार तक
हमारे कदम पहुँचाते हैं।
जो निरक्षर हैं,
उन्हें अक्षरों की दुनिया देते हैं;
जो भटक रहे हैं,
उन्हें सही दिशा देते हैं।
अज्ञान के अंधकार से निकालकर
ज्ञान के उजाले तक
ले जाते हैं शिक्षक।
शिक्षक हमारे लिए
केवल एक पद या नाम नहीं,
वे हमारी पहचान की नींव हैं,
हमारे संस्कारों की मिट्टी हैं,
हमारे भविष्य की मजबूत बुनियाद हैं।
माता-पिता हमें जीवन देते हैं,
शिक्षक उस जीवन को
सही अर्थ देते हैं।
वे हमारे भीतर
एक बेहतर इंसान बनने की
लौ जलाते हैं।
हमारी हर छोटी सफलता में
कहीं न कहीं उनका योगदान होता है,
हमारी हर उपलब्धि के पीछे
उनके शब्दों का आशीर्वाद होता है।
इसलिए शिक्षक का सम्मान
केवल एक दिन का उत्सव नहीं,
बल्कि जीवनभर निभाया जाने वाला
एक पवित्र दायित्व है।
हे शिक्षक!
आप ज्ञान की ज्योति हैं,
आप उम्मीद की किरण हैं,
आप हमारे आज के मार्गदर्शक
और आने वाले कल की
सुंदर नींव हैं।
आपसे ही सीखते हैं हम,
आपसे ही आगे बढ़ते हैं,
आप हमारे शिक्षक ही नहीं,
हमारे जीवन के सच्चे शिल्पकार हैं।
— रूपेश कुमार
