कविता

श्री कृष्ण हमारे सारथी और गुरु

विधा- कविता
शीर्षक- श्री कृष्ण हमारे सारथी और गुरु

हमारे जीवन रथ के सारथी श्री कृष्ण और गुरु,
जीवन की रणभूमि में हमारे सारथी बनते हैं,
लेशमात्र भी गुरुर नहीं जिनमें ऐसे थे वे गुरु,
भटक जाएं जब वे हमारे पथ-प्रदर्शक बनते हैं।

सुदर्शन चक्रधारी होकर के भी जो मुरली बजाते,
द्वारिका-वैभवधारी होकर भी सुदामा को गले लगाते,
तुम्हारी ही लड़ाई है पार्थ तुम्हें ही लड़ना है सिखाकर,
सर्वसामर्थ्य होकर भी वे सारथी बन राह दिखाते।

महाभारत के मैदान में गीता गायक थे श्री कृष्ण,
जगत को ज्ञान देने वाले महान नायक थे श्री कृष्ण,
सोलह कला सम्पन्न विलक्षण प्रतिभाधारी महारथी,
अज्ञान-भटकन हरने वाले तीक्ष्ण सायक थे श्री कृष्ण!

जीवन-रथ के सारथी कृष्ण और गुरु कृष्ण थे महान,
इनकी शिक्षा से रोशन हो रहा है आज भी सारा जहान,
मुरली की मधुर तान सिखाती प्रेम की राह पर चलना,
गुरु-कृपा से हटे अज्ञान-तिमिर, प्रकटे ज्ञान-विज्ञान।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

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