रिश्ते
वर्चुअल रिश्तों की अजीब हैं प्रेम कहानी,
कभी खिलती, कभी मुरझाती भरी जवानी।।
जोड़ती दिलों को, बनाती ये नजदीकियां,
तोल-मोल सही हो तो खिलती हिय कलियां।।
माना झूठ फरेब भी साथ-साथ हैं चलता,
पल में अपना, पल में पराया रस झरता।।
मृदुल स्पर्श, मौन स्वीकृति दिव्य आनंद नहीं,
वर्चुअल रिश्तों में आत्मीयता की नमीं नहीं।।
दोस्त, मित्र, सखा संबोधन भले विविध हो,
कंधे पर रखे हाथ का विश्वास वहां नहीं।।
आधुनिक युग की सुंदर देन हैं ये रिश्ते,
टूटना, बिखरना, रूठना-मनाना नई बात नहीं।।
प्रेम पगे रेशम धागे सा पावन ये बंधन नहीं,
माँ के आँचल-सा, पिता के छत्र-सा ममता दुलार नहीं।।
चाहे कम हो आपके अपने रिश्तेदार,
जो हो अपने हो, महकते फूलों से खुशबूदार।।
