कविता

मेरा और तुम्हारा मन

एक नदी के दो तट
सागर में मिल खुल जायें पट
हृदय दो, एक हो धड़कन।
मेरा और तुम्हारा मन।।

कदम- कदम हो साथ तुम्हारा
शब्द तुम्हारे गीत हमारा
बाहों में भर लें सारा गगन।
मेरा और तुम्हारा मन।।

अंधियारों में साथ चले
एक से दो हम हैं भले
विश्वास अटूट, हम हैं मगन।
मेरा और तुम्हारा मन।।

बने एक दीपक दो बाती
हम मीत चलाएं प्रेम रीत
हो जायें साकार सारे स्वप्न।
मेरा और तुम्हारा मन ।।

— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

नाम - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एम.ए., आई.डी.जी. बाॅम्बे सहित अन्य 5 प्रमाणपत्रीय कोर्स पत्रकारिता- आर्यावर्त केसरी, एकलव्य मानव संदेश सदस्य- मीडिया फोरम आॅफ इंडिया सहित 4 अन्य सामाजिक संगठनों में सदस्य अभिनय- कई क्षेत्रीय फिल्मों व अलबमों में प्रकाशन- दो लघु काव्य पुस्तिकायें व देशभर में हजारों रचनायें प्रकाशित मुख्य आजीविका- कृषि, मजदूरी, कम्यूनिकेशन शाॅप पता- गाँव रिहावली, फतेहाबाद, आगरा-283111

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