मेरा और तुम्हारा मन
एक नदी के दो तट
सागर में मिल खुल जायें पट
हृदय दो, एक हो धड़कन।
मेरा और तुम्हारा मन।।
कदम- कदम हो साथ तुम्हारा
शब्द तुम्हारे गीत हमारा
बाहों में भर लें सारा गगन।
मेरा और तुम्हारा मन।।
अंधियारों में साथ चले
एक से दो हम हैं भले
विश्वास अटूट, हम हैं मगन।
मेरा और तुम्हारा मन।।
बने एक दीपक दो बाती
हम मीत चलाएं प्रेम रीत
हो जायें साकार सारे स्वप्न।
मेरा और तुम्हारा मन ।।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
