क्षणिका *ब्रजेश गुप्ता 21/03/202523/03/2025 0 Comments क्षणिका जो कहते थे मोहब्बत में जी न सकेंगे तुम बिन मर जायेंगे हम वो भी जिन्दा हैं हम भी जिन्दा Read More
कविता *ब्रजेश गुप्ता 21/03/202523/03/2025 0 Comments वक़्त वक़्त के सुनहरे झांसे में न आ बेवफ़ा है यह बड़ा आज तुझसे कह रहा तेरा हूं मैं कल इसने Read More
कविता *ब्रजेश गुप्ता 21/03/202523/03/2025 0 Comments कविता कविता आखिर है क्या खुद के अंदर घुमड़ते भावों का उदगार जो अंकित हो जाते है कागज के पन्नों पे Read More
कविता *ब्रजेश गुप्ता 11/03/202512/03/2025 फाल्गुन मन मचल मचल पागल हुआ जाये फागुन की मस्तियों में रंगों की होली में मस्त कोयल कूक रही टेसू छटा Read More
कविता *ब्रजेश गुप्ता 03/03/202505/03/2025 कुत्ता इंसान से ज्यादा है वफादार जानवर अपनों पर कभी करता नहीं वार पता नहीं फिर क्यों कहते कुत्ता आदमी को Read More
क्षणिका *ब्रजेश गुप्ता 03/03/202505/03/2025 मुखोटे मुखोटे पहन हम जी रहे कृतिम मुस्कुराटे बिखेर रहे अंदर कटुता से भरे बाहर मधुर मधुर गीत बोल रहे Read More
कविता *ब्रजेश गुप्ता 15/02/202515/02/2025 सेवानिवृति सेवानिवृत होते ही मुक्त हुआ नौकरी की बंदिशों से लगा जैसे टूट गई हो बेड़िया गुलामी की आज़ाद हूँ बेपरवाह Read More
कविता *ब्रजेश गुप्ता 09/02/202510/02/2025 अपना दर्द दर्द अपना सुनाएँ तो सुनायें किसको वक़्त किसपर है इतना जो सुनें दास्तां हमारी हर एक तो गुजर रहा दर्दे Read More
कविता *ब्रजेश गुप्ता 06/02/202508/02/2025 यादें उम्र के इस पड़ाव पे जब अकेला हो गया हूँ याद आता है अब वही सब पुराना वो घर वो Read More
कविता *ब्रजेश गुप्ता 05/02/202507/02/2025 कविता कविता क्या मैं जानता नहीं मन में उमड़ते घुमड़ते विचार अपने चारों ओर दिखते व्यवहार लोगों की बोलती सुनती बात Read More