ज़िन्दगी…
ज़िन्दगी में हार-जीत का आम अफसाना है। कभी दर्द कभी खुशियों का मिलता खजाना है। हम सोचते रहते हैं ज्यादा
Read Moreपूछती धरा कभी गगन से …. होगा अपना भी मिलन फिर तुम उदास क्यों हो? देख कर तुम्हारी व्यथा मन
Read Moreन धर्म न जाति देखें आओ ऐसा हिन्दोस्तान बनाते हैं। कुछ हम बदलें कुछ तुम बदलो चलो सुंदर जहान बनाते
Read Moreसावन के इंतज़ार में वो अब खामोश होकर देख रही है गगन को जैसे अपना सब कुछ खो चुकी हो
Read Moreअपने वजूद का जब भी सवाल होता है। वतन का फिर कहां उनको ख्याल होता है। खूब लूटा जिन्होने वतन
Read Moreमुस्कुराते हैं होंठ और सदा मुस्कुराते रहेंगे। तुम लाख कोशिश कर लो हम न बदलेंगे। कितनी ही बाधाएं आईं राहों
Read Moreचोट जब स्वाभिमान पर लगती है तो, करारा जवाब फिर मिलता है। तुम लाख दगा करो हैं संस्कार तुम्हारे, पर
Read Moreव्यंग्य कविता। बात होती जब वतन की वो सवाल करते हैं। खामोशी से कभी आंखों से कमाल करते हैं। तुम
Read Moreसही को सही और ग़लत को ग़लत कहना है मुझे। ग़लत होते देख के यूं खामोश नहीं रहना है मुझे।
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