कविता

चलो सुंदर जहां बनाते हैं।

न धर्म न जाति देखें आओ ऐसा हिन्दोस्तान बनाते हैं।
कुछ हम बदलें कुछ तुम बदलो चलो सुंदर जहान बनाते हैं।

गैरों सी बात क्यों करें हम भला एक ही वतन के;
हिन्दु मुस्लिम सिख ईसाई से बेहतर है भारत की शान बनाते हैं।

वक्त बदला बहुत कुछ बदला सोच भी बदले तो बात बने;
नफरतों को भुलाकर आओ फिर वतन को महान बनाते हैं।

दुश्मन कैसे करता मजाल जो देखे घूर के इस ओर;
एकता की ताक़त दिखा उसको ही अब वीरान बनाते हैं।

बहुत हो गया झगड़ा अब आपस में झगड़ना छोड़ दो;
हिन्दी हैं हम वतन है विश्व में अमिट इसकी पहचान बनाते हैं।

वो लड़ाते रहे कभी धर्म कभी जाति के नाम पर हमको ;
उनके इरादों को अपनी अच्छाइयों से हम सुनसान बनाते हैं।

इक दौर था इतिहास का गर याद हो हमें अपने वतन का;
सोने की चिड़िया बना विश्व में पहले सी पहचान बनाते हैं।

चलो मिलकर इक अच्छा सा जहान बनाते हैं।

कामनी गुप्ता***
जम्मू !

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |