मंजिल पाना है अभी बाकी!
मैं सागर की नाव पुरानी,है मेरी अनबूझ कहानी,तूफानों से टकरा न पाती,संभालो मुझे हे राम-वरदानी। केवट बनकर आना प्रभु,नैय्या पार
Read Moreमैं सागर की नाव पुरानी,है मेरी अनबूझ कहानी,तूफानों से टकरा न पाती,संभालो मुझे हे राम-वरदानी। केवट बनकर आना प्रभु,नैय्या पार
Read Moreबुजुर्गों की सीख कितनी लाभदायक होती है, शायद हम में से हर एक जानता होगा! जन्मते ही माता-पिता, बड़े भाई-बहिन
Read Moreमहाकुम्भ में मोनालिसा की,महकती-सी मुस्कान,चंदन-रुद्राक्ष-मोती माला बेचती,बड़ी अनोखी शान। खूबसूरत ग्रीवा वाली,लहराते हुए बड़े-बड़े झुमके,हिरनी-सी आंखों वाली,तनिक नहीं शर्माती,बात करते
Read Moreमन की पतंग ऊंची उड़ना चाहे,जिधर चाहे उधर ही मुड़ना चाहे,देखो तो मगर पतंगकीउड़ान,अपनों से ही हरदम जुड़ना चाहे!अपने तो
Read Moreपतंगकी उड़ान देख,पतंग-सी उड़ने की चाह,कैसे उड़ सके मगर वह,मिल न सके कोई राह!बेटा होती तो कोई बाधा नहीं,उसकी तो
Read Moreदेखती हूँ जिसे बंद पलकों से मैं,एक धुंधली सी तस्वीर वो मेरी है,बंद करने वाले हाथ भी नहीं मेरे,शायद यही
Read More“अनूप तुम तो बहुत होशियार हो, आज मैं शाम को 5 बजे तुम्हारे घर तुमसे कुछ सवाल सीखने आऊंगा.” विनीत
Read More