कविता

जीवन के अनमोल बरस

जीवन के अनमोल बरसगृहस्थी को समर्पित कर चुकीबेबस नारी ने कहाअब पानी सर से गुजर चुका हैसहनशीलता का बांध टूट चुका हैइतना कुछ अर्पण करने के बादक्या मिला सिर्फ तिरस्कारबस अब और नहींइन यातनाओं काकोई छोर नही तोड़ती हूं हर रिश्ताफरेब का पाना चाहती हूंखुशियां सभी तोड़करबेड़ियां अपनी पाना चाहती हूंअपना स्वच्छंद आकाशजीना चाहती हूं […]