ग़ज़ल
अब तो आते नहीं है रास ये नाले मुझकोकर दे गुमनाम हवाओं के हवाले मुझको मैं तो लड़ता रहा ताउम्र
Read Moreगीत गजल दोहे चौपाई भटक रहे हैं मन मरुस्थल मेंकिस से पीर बताई जाए यह भी गायब वह भी गायबमंच
Read Moreधनिया हरी टमाटर लालसिल पर पिस कर करे कमाल संग प्याज के गरम पकोड़ेमिर्च कर रही खूब धमाल मौसम की
Read Moreत्रेता की पावन स्मृति की जग को बोध कराने वालीरावण वध के बाद राम की जय गाथा दुहराने वाली जन
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