Author: *प्रमोद दीक्षित 'मलय'

पुस्तक समीक्षा

सफ़र हमारे : स्वप्न और यथार्थ से रूबरू कराते रोमांचक यात्रा वृत्तांत

“सूखा ताल नीचे गहरी खाई में था। उसके साथ-साथ ही पहाड़ की यह खड़ी दीवार थी, जिसके किनारे पर खड़े

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पुस्तक समीक्षा

छूटा पीछे पहाड़ : स्मृतियों के वातायन से आता शीतल पवन का झोंका

 साहित्य की विविध विधाओं में संस्मरण, यात्रावृत्त एवं आत्मकथाएं पाठकों को बहुत लुभाती रही हैं। कारण कि हर कोई अपने

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सामाजिक

नवीन शोधों के साथ परम्परा का पथ अपनाने का समय

भारत में ज्ञान संस्कृति की सम्पदा श्रुत परम्परा में सुरक्षित, संरक्षित एवं जीवित रही है। इसीलिए वेदों एवं अन्य आर्ष

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भाषा-साहित्य

विश्व रंगमंच दिवस – रंगमंच को संवारने के संकल्प का दिन

नाटक दर्शकों को प्रेम, रहस्य, रोमांच, हर्ष, खुशी, आत्मीयता और सौंदर्य की उस ऊंचाई पर ले जाता है जहां वे

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सामाजिक

सूने हैं पनघट और प्यासे हैं पोखर-ताल

संस्कृत वांग्मय का आंगन जल-महात्म्य के श्लोंको-ऋचाओं से परिपूर्ण है। आप: वंदे मातरम् कह कर प्राणिमात्र के पोषण के लिए

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पुस्तक समीक्षा

रोचक एवं मनमोहक संस्मरणों की पोटली है स्मृति की खिड़की

एक पाठक के तौर पर संस्मरण मुझे हमेशा आकर्षित करते रहे हैं। एक तो यही कि संस्मरण पढ़कर सम्बंधित व्यक्ति

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