संतुष्टि
“वाह ! क्या आनंद ही आनंद है। ऐसा लग रहा है कि यहीं ठहर जाऊँ कुछ दिनों के लिए। चारों
Read Moreपींयर –पींयर धनहा बाली। बिहना पड़थे सूरज लाली।। घाम अगासा के वो सहिथे। धान सोन कस चमकत रहिथे।। चिरई–चिरगुन गाना
Read Moreनवरात्री लगते ही भक्तगण माँ अम्बे, भवानी , दुर्गा जैसे विभिन्न रूपों की प्रतिमा का
Read More“अभी तक खेत से माँ-बाबूजी दोनों नहीं आये हैं। कम से कम माँ को तो
Read Moreठुमक–ठुमक आए कन्हैया, देखो नटखट है नंदलाल, छम–छम छम घुंँघरू बाजे,
Read Moreसूखे पत्तों से ये रिश्ते, देखो कैसे फिसल रहे हैं। लोभ दिखा थोड़े पैसों का, अमरबेल सा छिछल रहे हैं।।
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