सावन की झड़ी
रिमझिम बारिश की ये बूंँदें, धरती पर आती। नयी कोपलें विकसित होतीं, रहती
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Read Moreबहुत पुरानी बात है। बोरसी नामक एक घना जंगल था। वन की दक्षिण दिशा में किरवई नदी बहती थी। नदी
Read Moreसड़क किनारे बिजली खंभे। पड़ते बच्चे लगे अचम्भे।। शहर शहर अरु गांँव गांँव में।खड़े रहे ये एक पांँव में।। वायर
Read More” ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो चुका है। मैंने पहले ही तुमसे कहा था कि हम यहाँ से दूसरे वन
Read Moreभटक रहे हैं हम बेचारे, कहाँ कहाँ अब जायेंगे। जरा बताओ हमको मानव, कैसे प्यास बुझायेंगे।। सूरज दादा नहीं समझते,
Read Moreछोड़ चलो तुम अहंकार को, बनो नेक इंसान। सदा सत्य मीठी वाणी हो, प्राप्त करो सम्मान।। आज जमाना सुंदरता का,
Read Moreबर्तन माँजती हुई स्नेहा को जब पता चला कि उसकी सास उसे न केवल घूर रही है, बल्कि तंज कसते
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