लघुकथा – रेपुटेशन
अरसे बाद गाँव की गलियों में कदम रखते ही बच्चे ,बुढ़े सब उसे टकटकी निगाहों से देख रहे थे अरे!
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Read Moreरुपा की डिलिवरी के समय भी काफी दिक्कतें आई थी…और अब तो उसे अपने बच्चे के लिए हमेशा ही साथ
Read Moreविभा की विवाह की तैयारियाँ शुरु हो चुकी थी,सभी अपने में मग्न जैसे समय ही कम पड़ रहा हो. विभा
Read Moreगाँव मोहल्ले में चुनाव की चर्चा जोर शोर से चल रही थी। “भाई !अबकी टिकट किस आधार पर मिलेंगे अवतार
Read Moreढाई बरस का मंकू भूख के कारण बार बार अपनी माँ लाली को झिंझोड़ रहा था , पर पास बैठी लाली
Read More“रामदीन! रामदीन!,अरे कहाँ हो?” “भाई,नाम पुकारा जा रहा है तुम्हारा।” “जल्दी आओ! निकल जायेंगे डॉक्टर साहब।” पर्ची बनाने वाला फीस
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