बाल कविता – किताबों के शहर में
आओ बच्चो तुम्हें घुमाएं किताबों के शहर में। शब्द फूल बन के महके खिले हुए गुलजार में। ज्ञानवर्धक बातें मिलेंगी
Read Moreआओ बच्चो तुम्हें घुमाएं किताबों के शहर में। शब्द फूल बन के महके खिले हुए गुलजार में। ज्ञानवर्धक बातें मिलेंगी
Read Moreधर्मों की आड़ में इंसान, चलता कुचाली चाल देखा। चहुँ और फैला था ज़मी पे, रंग लहू का लाल देखा।
Read Moreविवेकी बनो सत्यपथ के,जीवन का तुम आधार बनो। इंसानियत के देव बनो , हर मानव मन का प्यार बनो। पतझड़
Read Moreराज की राजनीति, बहुत गहरा राज है। डर के मारे मुख, कोई न खोले आज है। झूठ सत्य का नकाब,ओढ़े
Read Moreआकर देखो प्यारे बापू , हिंद किस ओर है जा रहा। बहुत तरक्की की देश ने, अपना अपनों को खा
Read Moreअपनों का प्यार पाए जमाना गुजर गया। हँस कर दिन बिताए जमाना गुजर गया। अब कौन खिलाता प्यार और दुलार
Read Moreअजब सी इस दुनिया का गज़ब का कलाकार हूँ। हुनरमंद हूँ जो चाहूँ कर सकता ऐसा चमत्कार हू़ँ। नित पहनता
Read Moreछोड़ लोगों की ईर्ष्या को, अपने पथ पर बढ़ता जा। जो राह का अवरोधक हो, निष्ठुर मन से लड़ता जा।
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