लम्बी कहानी ‘रखैली’ – भाग 4
(3) सज्जाद की हवेली सारिका को अपने ख्यालो में भी ये उम्मीद नहीं थी कि स्यालकोट के पास महमूदाबाद कस्बे
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Read Moreये फैमनिस्ट जो किसी सतायी गई औरत के लिए बाबुलंद आवाज़ उठाती है उनके लिए सोशल साईट पर तमाम क्रन्तिकारी
Read Moreसज्जाद की सहेली हालाँकि सज्जाद की पूछी गई पहेली के कोई मायने नहीं थे। न ही उसकी शर्त मानने को
Read Moreभाग – 1 (1)सज्जाद की पहेली ‘आप यहाँ… ?’सारिका ने उसे दूर से देख लिया था लेकिन पार्टी की गहमा
Read More‘तो आपने शादी नहीं की, मतलब गैर शादीशुदा हो ?’ मेरे सवाल पे वो तनिक करीब आते हुए बोली ‘हाँ
Read Moreमेरे पिता ज़मीदार नहीं थे पर उनका रुतबा किसी ज़मीदार से कम नहीं था। उनका रुतबा होता भी कैसे कम
Read Moreयद्द्पि मुगलिया सल्तनत 1857में ही ख़त्म हो गई थी पर वो फिर भी इसी आस में रहे की कभी न
Read Moreप्रिया ने मुझसे पूछा ये BHMB क्या होता है। मैने गौर से प्रिया को देखकर कहा ‘नहीं जानता।’ मेरा जवाब
Read Moreउसने कहा था एक दिन खुली किताब हूँ मैं। पढ़के जान लो मुझे। एक सर्द शाम में, मैं ये जान
Read Moreदिसम्बर के महीने में वो मिली थी उस धूप के बादल से दिन और तारीख उसे अब याद नहीं सुबह
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