चौपाई
विविध गंगा डुबकी चलो लगाएँ।अमृत स्नान का पुण्य कमाएं।।आखिर कल किसने देखा है।लंबी कितनी ये रेखा है।। महाकुंभ सौभाग्य हमारा।संगम
Read Moreमुझे बुरा जो कह रहे, उनका है आभार।इससे उत्तम और क्या, हो सकता उपहार।तेज कदम से भागते , मंजिल जिनकी
Read Moreसूरज मल छोटी बाई की, कनक प्रभा संतान।मातु पिता ने दिया कला था, सुंदर प्यारा नाम।। विवेक शील ममता मयी,
Read Moreपिता सूरजमल जी एवं माता छोटी बाई की सुताकुशाग्र , बुद्धि, विवेकशील कलातेरापंथी साध्वियों में अग्रिम पंक्ति पद हासिल किया,साध्वी
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