मुक्तक
कभी तुम आस लगते हो, कभी बकवास लगते हो,कभी मधुशाला वालों के लिए मधुमास लगते हो,कहो कट्टर स्वयं को तुम,
Read Moreदीपक की बाती-सा शिक्षक,ईश्वर की पाती-सा शिक्षक,द्रोण,दधीच,फुले, कृष्णन कीहै भारत में थाती शिक्षक। खुद जलकर देवे उजियारा,तुमने हिय के तम
Read Moreहकले ने फिर काम कर दिया, भगवा को बदनाम कर दिया। काम न करते लाख मदरसे, ये वैसा अंजाम कर
Read Moreसारे कचरे खा जाता था, गोबर सभी पचा जाता था। सड़ा गला भोजन जो दे दो, बिन बोले निपटा जाता
Read Moreबाग-बगीचे वाले दिन, बचपन के मतवाले दिन। कितने भोले भाले दिन, लगते बहुत निराले दिन। बगिया की याद आती है,
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