स्थान
शाम के धुंधलके में दरवाजे पर कोई साया नजर आया बाबुलालजी अपना चश्मा पहनते हुए पूछा “कौन है दरवाजे पर?”
Read Moreसिहरने लगी है ये शाम जरा रात भी है कुछ अलसाई-सी ओस की बूंदों से सराबोर कोहरे के चादर लपेट
Read Moreरोशन घरों के कोने में अंधेरा क्यों है खुशियों में भी ग़म की परछाईं क्यों है? मुस्कुराहट तो हर वक्त
Read Moreएक बहाना तो दो जीने का मरने के तो कई बहाने है। एक तराना तो छेड़ो जिंदगी का मौत के
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