राजनीति

असली मुस्लिम ब्रदरहुड तो कांग्रेस पार्टी ही है

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर विदेशी धरती से बयानबाजी करके देश की राजनीति में भूकम्प लाने की असफल कोशिश की है। जब आधा देश बाढ़ आदि प्राकृतिक आपादाओें के दंश में डूबा है उस समय राहुल गांधी विदेशों में जाकर भाजपा, संघ व भारत के खिलाफ बयानबाजी करके देश का माहौल खराब करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। राहुल गांधी के भाषणों में भाजपा व संघ के प्रति नफरत का जहर भरा हुआ है जो अब बाहर निकल रहा है। राहुल गांधी ने संघ की तुलना आईएस व मुस्लिम ब्रदरहुड से करके अपनी लचर बौद्धिक क्षमता का परिचय दिया है। उनके बयानों से साफ झलक रहा है कि गांधी परिवार सहित कई कांग्रेसी नेताओं पर चल रहे मुकदमों तथा एक के बाद एक लगातार पराजयों से जूझ रहे राहुल गांधी अब पूरी तरह से आतंकवाद व कट्टरवाद का समर्थन करके सत्ता पाने का सपना देख रहे हैं। राहुल गांधी के बयानों से देखकर लग रहा है कि उन्हें किसी अच्छे मनोवैज्ञानिक चिकित्सक की बेहद आवश्यकता है।
राहुल गांधी अपने पुरखों की बातों और उनके इतिहास को पूरी तरह से भूल गये हैं। आज वे संघ की तुलना आईएस व मुस्लिम ब्रदरहुड से कर रहे हैं। उन्हें यह बात अच्छी तरह से पता होगी कि आज की जो कांग्रेस है उसका जन्मदाता एक अंग्रेज ही था। कांग्रेस की जो पूर्व अध्यक्षा है सोनिया गांधी वह भी मूलतः इटली की हैं। सोनिया की मातृभूमि इटली ही है। हमारे देश के लिए व हिंदू समाज के लिए असली मुस्लिम ब्रदरहुड तो कांग्रेस ही है। यह वही कांग्रेस पार्टी है जिसके पूर्वज जवाहर लाल नेहरू की सत्ता लोलुपता के कारण ही भारत अखंड न रह सका। 1947 में भारत का विभाजन कांग्रेस व गांधी परिवार ने ही कराया था। तब से लेकर आज तक कांग्रेस पार्टी के लोग हिंदू समाज के खिलाफ खून के प्यासे हो रहे हैं। कांग्रेस ने विगत 70 सालों से हिंदू समाज का अपमान किया है तथा उनकी हत्याओं, बहू -बेटियोें के साथ रेप आदि की घटनाओं में कांग्रेसी तत्वों का ही हाथ रहा है। 1947 में देश विभाजन के दौरान हिंदुओं का खून सड़क पर बहने के लिए कांग्रेस ही दोषी है। कांग्रेस के शासनकाल में ही नई दिल्ली में निहत्थे गौभक्तों पर लाठीचार्ज और गोलीवर्षा करायी गयी थी।
कांग्रेस का 70 साल का शासन काल गवाह रहा है कि देश भर के अधिकांश राज्यों में बड़ी-बड़ी साम्प्रदायिक घटनायें हुई हैं। चाहे वह बिहार का भागलपुर दंगा हो या फिर 6 दिसंबर की घटना के बाद मुंबई के बम धमाके व मंुबई की भयानक हिंसा का दौर हो। कश्मीर घाटी का हिंदू आज भी नारकीय जीवन भोग रहा है। कश्मीरी हिंदुओं के नाम पर कांग्रेसियों को मुंह बंद हो जाता है, लेकिन बांग्लादेशी घुसपैठियों व रोहिंग्या मुसलमानों को बसाने के लिए ये लोग संविधान व सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ भी बयानबाजी कर रहे हैं। आज कांग्रेस दोमुंहा नहीं चैमुंहा जहरीला नाग बनती जा रही है। कांग्रेस पार्टी के लोगों ने विगत 70 सालों से देश को दीमक की तरह चाटा है। आज वह दीमक साफ किया जा रहा है तब उनके पेट में दर्द हो रहा है तथा यही कारण है कि संघ आज उनको आईएसआईएस व मुस्लिम ब्रदरहुड नजर आ रहा है। अगर कांगे्रस की नजर में संघ मुस्लिम ब्रदरहुड है तो क्या प्रणव मुखर्जी और रतन टाटा भी ब्रदरहुड हैं?
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 के सिख दंगे कांग्रेसियों ने ही किये और करवाये थे यह पूरा देश अच्छी तरह से जानता है। सिख दंगों के मामलों को किस तरह से दबाया गया था यह भी पूरा देश देख रहा था। आज मोदी सरकार में ही सिख दंगों की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित एसआईटी कर रही है जिसकी जांच रिपोर्ट अब आने वाली है। इंदिरा की हत्या के बाद पूरे देश को कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हिंसा मय कर दिया था। घर-घर मेें, गली-गली में हर जनमानस में कांग्रेसी गुंडों का भय सिर चढ़कर बोल रहा था। देश के इतिहास में सबसे बड़ी माब लिंचिंग 1947 में हुई, फिर उसके बाद 1984 के सिख दंगों में हुई थी। अब राहुल गांधी को यह भी बताना होगा कि क्या वे अगला चुनाव जीतने के लिए कोई बड़ी साजिश रच रहे हैं? यह पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ही थे जिन्होंने देश के संसाधनों के शत प्रतिशत हिस्से पर मुसलमानों का अधिकार बता दिया था। उसी के बाद कांग्रेस पार्टी का पतन शुरू हो गया था।
विदेश में बैठकर राहुल गांधी कह रहे हैं कि रोजगार की कमी व समाज के कुछ लोगों को विकास की मुख्यधारा से हटाने के कारण ही आईएस आईएस जैसे आतंकी संगठन पनपते हैं। इससे उनकी बौद्धिक क्षमता पर ग्रहण लगा रहा है। एक प्रकार से वे आतंकवाद और हिंसा का समर्थन कर रहे हैं। राहुल गांधी पूरी तरह से बौखलाये हुए हैं तथा वह सोची-समझी रणनीति के तहत विदेशों में बैठकर संघ के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। जिस दिन उन्होंने संघ के खिलाफ बयानबाजी की, तभी बरेली और राजस्थान के टोंक शहर में मदरसों के अंदर से शांतिपूर्वक जा रहे कांवड़ियों पर माहौल खराब करने के लिए पत्थरबाजी की गयी व तनाव का वातावरण पैदा कर दिया गया।
राहुल गांधी ने संघ व भाजपा को समाप्त करने का सपना देखा है। आज देश के लोकतांत्रिक इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि देश के सभी सर्वोच्च पदों पर संघ से निकले हुए व्यक्ति विराजमान हैं। यही बात राहुल गांधी जैसे महामूर्ख राजनीतिज्ञ को अखर रही है। आज से चार साल पहले पूरे देशभर में केवल उन्हीं की तूती बोलती थी तथा उन्हीं के परिवार के गंुंडों की तानाशाही चला करती थी। अब उनकी बातों से तिनका भी नहीं उड़ पा रहा है। यही बात राहुल गांधी को अखर रही है। आज राहुल गांधी को देश का संविधान ही खराब नजर आने लगा है। राहुल गांधी ने संघ की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से करके संघ का एक बार फिर अपमान किया है। वह देश के हिंदू समाज को पूरी तरह से ध्वस्त कर देना चाहते हैं। हिंदू समाज सैकड़ों वर्षों से ऐसे हमले झेलता आ रहा हैं। राहुल के हमलों से न तो संघ डरने वाला है और न ही समाप्त होने वाला है। राहुल गांधी ने अभी भी कुछ नहीं सीखा है। पता नहीं सोनिया गांधी अपने लाडले को क्या सिखा रही हैं।
राहुल गांधी पीएम मोदी व संघ के प्रति से पूरी तरह से नफरत की आग में जल रहे हैं। आज जब देश के गरीब वर्गों का वास्तविक उत्थान हो रहा है, तब उन्हें जलन हो रही है। उन्हें यही सिखाया व बताया गया है कि यह देश गांधी परिवार की निजी संपत्ति है जिस पर दूसरे गुट ने कब्जा कर लिया है। राहुल गांधी संघ व हिंदू समाज को अपमानित कर रहे हैं तथा इसकी आड़ में वे मुस्लिम समाज को भड़काकर अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं। राहुल के ये जहरीले बोल कहीं कांग्रेस का पूरी तरह से समापन ही न कर दें।

मृत्युंजय दीक्षित