लघुकथा

लघुकथा : मुहिम

दहेज नाम से ही उसे नफरत हो गयी | बहन की शादी में सबसे बड़ा रोड़ा था दहेज | उसने दहेज के विरुद्ध बहुत बड़ी मुहिम छेड़ने का मन बनाया था | इसके लिए एक टीम भी बनाई | पर उसे उस समय बड़ा झटका लगा जब उसकी टीम में से अधिकाँश लडको ने दहेज लेकर विवाह किया |
बहन की बारात बिना दुल्हन लिए लौट गयी | उसी मंडप में एक भला मानुष भी आया हुआ था | उसके साथ बहन का पाणीग्रहण संस्कार सम्पन हुआ | वही सज्जन दहेज विरोधी उसकी मुहिम का मुखिया घोषित हुआ |

शान्ति पुरोहित

निज आनंद के लिए लिखती हूँ जो भी शब्द गढ़ लेती हूँ कागज पर उतार कर आपके समक्ष रख देती हूँ

4 thoughts on “लघुकथा : मुहिम

  • अच्छी कथा .

    • शान्ति पुरोहित

      आभार आपका

  • विजय कुमार सिंघल

    छोटी परन्तु सोचने को बाध्य करने वाली लघुकथा.

    • शान्ति पुरोहित

      आभार विजय भाई जी

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