लघुकथा : मुहिम
दहेज नाम से ही उसे नफरत हो गयी | बहन की शादी में सबसे बड़ा रोड़ा था दहेज | उसने दहेज के विरुद्ध बहुत बड़ी मुहिम छेड़ने का मन बनाया था | इसके लिए एक टीम भी बनाई | पर उसे उस समय बड़ा झटका लगा जब उसकी टीम में से अधिकाँश लडको ने दहेज लेकर विवाह किया |
बहन की बारात बिना दुल्हन लिए लौट गयी | उसी मंडप में एक भला मानुष भी आया हुआ था | उसके साथ बहन का पाणीग्रहण संस्कार सम्पन हुआ | वही सज्जन दहेज विरोधी उसकी मुहिम का मुखिया घोषित हुआ |

अच्छी कथा .
आभार आपका
छोटी परन्तु सोचने को बाध्य करने वाली लघुकथा.
आभार विजय भाई जी