सामाजिक

अपनी विरासत, अपना गौरव : स्थानीयता की मजबूती

इतनी भीषण गर्मी में जब आप बाज़ार निकलते हैं तो देखा होगा कि आपको को गर्मी और धूप से बचाने के लिये शामियाने लगे हुए हैं और जगह-जगह पर ठंडे पानी की व्यवस्था की गई है। इसी तरह से ये वारिस के समय में भी आपका-हमारा ध्यान रखते हैं।

आपके ध्याननार्थ यह सब व्यवस्था “स्थानीय दुकानदारों” ने बिना सरकारी सहायता के आपसी चन्दा इकट्ठा कर, मिलकर की हुई होती है।

इतना ही नहीं धूप में आपकी गाड़ी की सीट गर्म हो गई हो तो सीट को ठंडा करने के लिये पानी भी यही “स्थानीय दुकानदार” देता है। राह चलते किसी राहगीर की तबियत खराब हो गई हो तो उसको पंखा-कूलर-एसी की शीतल छाया में बैठाने या हॉस्पिटल तक पहुंचाने की व्यवस्था भी यही “स्थानीय दुकानदार” करता है।

किसी दुकान में प्रवेश करते ही आपको सम्मान के साथ ठंडे पानी, लस्सी वगैरह को पूछने वाला भी यही “स्थानीय दुकानदार” ही होता है।

आपको किसी गली या प्रथम मंजिल तक जाना हो तो “भैया गाड़ी रख दूँ क्या ? थोड़ा सा ध्यान रख लेना” ऐसा कहकर आपकी गाड़ी की मुफ़्त की पार्किंग और हिफाज़त का ज़िम्मा भी यही “स्थानीय दुकानदार” उठाता है।

जब आपको टैक्सी या कैब वाले को भुगतान करना हो तब छुट्टे पैसे/चेंज भी यही “स्थानीय दुकानदार” देते हैं।

यहां तक कि ऑनलाइन खरीददारी का भुगतान करना हो तब भी बेचारे यह लोग पैसे छुट्टे देने में आनाकानी नहीं करते।

उपरोक्त सभी पर विचार कर बतायें – बदले में आप क्या करते हैं ?

रुमाल से लेकर साड़ी तक, चार्जर से लेकर लेपटॉप तक यहां तक कि दैनिक उपयोग की हर छोटी बड़ी ख़रीदारी भी आप ऑनलाइन कर रहे हैं।

कृपया ध्यान दे लें मैं ऑनलाइन ख़रीदारी के ख़िलाफ़ नहीं हूं, मगर ऑनलाइन पर ही निर्भर हो जाना हर लिहाज से खराब है।

जब इन “स्थानीय दुकानदार” का धंधा ख़त्म हो जाएगा तो आपको मिलने वाली उपरोक्त अघोषित सेवाएं मिलनी भी बन्द हो जाएगी।

इसलिए कोशिश करें स्थानीय व्यापार और व्यापारियों दोनों को जीवित रखें क्योंकि ये वे लोग हैं जो सर्वशक्तिमान से केवल एक ही प्रार्थना करते हैं, वो है –

साईं इतना दीजिए, जा में कुटुंब समाय।
मैं भी भूखा न रहूं, साधु ना भूखा जाय।।

— गोवर्द्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’

गोवर्धन दास बिन्नानी 'राजा बाबू'

जय नारायण ब्यास कॉलोनी बीकानेर / मुम्बई 7976870397 / 9829129011 [W]

Leave a Reply