जिंदगी
धूप -छांव का संगम जिंदगी,
एक हवा का झोंका जिंदगी ।
गम, मुश्किलें, असफलताएं,
साथ अपने लिए जिंदगी ।
कही, अनकही बातों की
लिखी किताब सी जिंदगी ।
निश्चित कोई ठिकाना नहीं,
पानी का बुलबुला जिंदगी।
रंजोगम में भी मुस्कुराए,
वही तो है असली जिंदगी ।
सफर-दर-सफर हमसफर,
मिला नेक हमसफर मजा जिंदगी ।
कभी अपनों, कभी परायों के वास्ते,
जीते रहो जब तक मिली जिंदगी ।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
