कविता

सावन की फुहार

आसमान में घूमते बादल
हवाओं के साथ लाते पानी
बरस रहे हैं रुक- रुक कर
खेतों में हुआ पानी
छप-छप करते बच्चे पानी में
किसानों ने भी ली अंगड़ाई
देख लहलहाते फसलों को
सावन के गा रहे गीत सब
चारो तरफ आयी हरियाली
हर तरफ है खुशिया
सावन की जब पड़ी फुहार

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com

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