कुण्डली/छंद

ऋषभ छंद

गुरु शिक्षा का दे वरदान, हमें बनाते ज्ञानी।

सहज सरल समझाते भेद, अनुशासित अभिमानी।।

चुनना नित शूलों से फूल, हुनर हमें सिखलाते।

घट गढ़ते दे सुंदर रूप, दिव्य विभा दमकाते।।

विनयी विनम्र पाएं ज्ञान, गुरुवर जीवन तारी।।

नमन करें हम शत-शत बार, नव चेतन हितकारी।।

चरणों में करूं गुरु प्रणाम, शुभचिंतक सुखकारी। 

मनन पठन से ज्ञान विकास, मन होता संस्कारी।।

मिलती ध्यान योग से शान्ति, मिटे रोग तृष्णाई।

खुशियां महके हर घर द्वार, प्रेम गंग छलकाई।।

अपनापन मन में सम्मान, रिश्तों को महकाएं।

सुख के पल मत करना व्यर्थ, कोई लौट न आएं।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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