मित्रो! ये है अपना “इसरो”
अंधेरे को चीर निकली, रोशनी की एक नई किरण,
आसमान की ऊँचाइयों पे, लिखीं एक नई दास्तान।
श्रीहरिकोटा की धरती से, जब रॉकेट ने भरी उड़ान,
गर्व से ऊँचा हुआ तिरंगा, गूँजता भारत का सम्मान।
जीएसएलवी की गर्जना में, सपनों ने आकार लिया,
‘ईओएस-05’ कक्षा में पहुँचा, देश ने इतिहास रचा।
अब धरती की हलचल पर, नज़र रखेगा यह उपग्रह,
कृषि, मौसम और आपदा में, देश का प्रहरी हमराह।
2 हजार 3 सौ किलो का, वजन लेकर ‘नभ’ में गया,
सटीक कक्षा में पहुँचाकर, फिर दुनिया से कह गया।
हम केवल सपने नहीं देखते, सपनों को सच करते हैं,
जहाँ दुनिया पग रोकती, वहाँ से हम उड़ान भरते हैं।
हाँ, अंधेरे से उजियारे तक, ये यात्रा यूँ ही चलती रहे,
विज्ञान के पंखों पे भारत, हर आकाश को छूता रहे।
मित्रों! ये है अपना इसरो, हिंदुस्तान का अभिमान है,
धरती से लेकर अंतरिक्ष तक, हमारी यह पहचान है।
(संदर्भ – ईओएस-05 को उसकी कक्षा मे पहुंचाया।)
— संजय एम तराणेकर
