राजनीति

सनातन द्रोह की विकृत राजनीति 

सभी राजनैतिक दलों ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां तीव्र कर दी हैं और जनता के मध्य अपने चुनावी मुद्दों व अभियानों के सन्दर्भ में नैरेटिव बनाना भी प्रारम्भ कर दिया है। स्वाभाविक रूप से वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा के हिंदुत्व बनाम सपा गठबंधन के मुस्लिम तुष्टिकरण के मध्य भिड़ंत होने वाली है।  

उत्तर प्रदेश में सपा मुखिया आजकल अपने आपको सनातनी व हिंदू बताने को मजबूर हो रहे हैं किंतु उनका यह प्रयास बार -बार नाकाम होता जाटा है। उत्तर प्रदेश में सपा के नेतृत्व वाला इंडी गठबंधन बुरी तरह से भ्रमित  हो गया है। अयोध्या आन्दोलन में कार सेवकों पर गोली चलवाने से लेकर वहां दिव्य व भव्य राम मंदिर के निर्माण तक इनके स्वर विरोध में रहे, अन्य  धार्मिक स्थलों के विकास की योजनाओं में भी इस गठबंधन ने कोई सहयोग नहीं दिया वरन रोड़े अटकाने का प्रयास किया। किन्तु  चढ़ावा चोरी की आड़ में सनातन द्रोही राजनीति जरूर कर रहे हैं।

अयोध्या में हुई दुर्भाग्यपूर्ण चढ़ावा चोरी घटना की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गहन जांच चल रही है किन्तु इंडी गठबंधन के  सभी दल इस घटना की आड़ में भारतीय जनता पार्टी व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ तो अभियान चला ही रहे हैं लेकिन  साथ ही वह मंदिर के प्रति नफरत से इतने भरे हुए हैं कि मंदिरों के प्रतिष्ठा को किसी न किसी प्रकार से कम करने में लगे हैं । इन सभी हिंदू विरोधी दलों का यही प्रयास चल रहा है किसी न किसी प्रकार से हिन्दू समाज मंदिरों का दर्शन करना बंद कर दे। हिन्दू समाज ने इनकी यह भावना समझ गया है और इनके बहकावे मे आने वाला नहीं है। सहारनपुर जिले में  सरकारी जमीन पर बनी एक अवैध मस्जिद को कोर्ट के आदेश के बाद हटा दिया गया। अतिक्रमण हटाए जाने की इस कार्यवाई के बाद सपा सहित सभी विरोधी दलों की बयानबाजी से यह स्पष्ट हो गया कि यह सभी दल हिन्दुओं के मंदिरों के प्रति अश्रद्धा का भाव रखते हैं। 

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन और उसमें एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की  सीईओ के पद पर नियुक्ति के बाद से इन नेताओं ने न केवल  अपनी विकृत बयानबाजी प्रारंभ कर दी अपितु पूर्व एयर मार्शल को बदनाम करने के लिए फेक वीडियो भी जारी कर दिए जिसे पाकिस्तानी हैंडलर के एकाउंट्स से फैलाया जा रहा था। जिन बयान बहादुर राजनैतिक लोगों की हिंदू मंदिरों के प्रति कोई आस्था नहीं है ऐसे नेताओं से कांग्रेस पार्टी बयान जारी करवा रही है और हिन्दुओं को अपमानित करते हुए, हिंदुओं के प्रति अपनी नफरत की भावना का प्रसार कर रही है। जैसे ही जितेंद्र मिश्रा का नाम सामने आया वैसे ही कांग्रेस का हिंदू विरोधी ईकोसिस्टम सक्रिय हो गया। सबसे पहले इमरान मसूद ने कहा कि मंदिरों में पूजा पाठ करना संतों का काम है  फिर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी का बयान आया कि ऑपरेशन  सिंदूर की नाकामी व उसके सत्य को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है फिर इसमें उदित राज जो कि हमेशा से मंदिरों व हिंदुओं  की एकता के खिलाफ रहे हैं जातिवाद का मुद्दा लेकर आ गए और कहा कि हर बार मिश्रा ही क्यों? एक नेता ने तो ऑपरेशन सिंदूर के नायक को सीधा -सीधा चोर ही कह दिया। कांग्रेस के नेताओं ने बयानों  के माध्यम से एक बार फिर हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक राम मंदिर का अपमान तो किया ही साथ ही भारतीय सेना का भी अपमान कर दिया। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि नई चीजें करने से पुरानी चीजों  को दबाया नहीं जा सकता ऐसा कहते हुए अखिलेश भूल जाते हैं कि कुछ भी करके वो कारसेवकों के नरसंहार को हिन्दुओं की स्मृति से मिटा नहीं सकते। 

500 वर्षों से अधिक समय के अथक परिश्रम व संघर्षो के बाद अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि पर दिव्य व भव्य राम मंदिर अपनी पूर्णता की ओर अग्रसर है तथा अयोध्या नगरी विकास के पथ पर अग्रसर है। अयोध्या में 18 करोड़ से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं जिसमें युवा पीढ़ी भी बढ़ चढ़ कर आ रही है। बस यही बात सभी सेक्युलर दलों को खटक रही है और उन्होंने मंदिरों के प्रति आस्था को डिगाने का अभियान छेड़ दिया है।

— मृत्युंजय दीक्षित 

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