कविता
सोचता हूँ मैं काश!बोल पाता मैं साक्षी हूँ हर पल का देखा सिर से तन जुदा होते नाबालिग को पेड़
Read Moreअजनबी पत्थरों के देश में, देखा इन्सान पत्थरों के बने I बहुत सहलाया, प्यार भी किया, चूमा, पलकों पर बिठाया
Read Moreखामोशी से निकल गया था वह, विकास की तलाश में अर्जित करने ज्ञान का प्रकाश कुछ रश्मियाँ हाथ आईं सरस्वती
Read Moreविदा हो गई, खूँटी पर टँगी औरत जिस पर कोई भी कुछ टाँग देता खूँटी कुछ नहीं बोलती कभी पुराना
Read Moreशिल्प विधान – जगण जगण , 121 121 चरण तुकांत, 6 वर्ण प्रति चरण 1. बढ़े हम वीर । बने
Read Moreखासी मान्यता है कि ईश्वर की पहली रचना पृथ्वी अर्थात का रम्यो और उनका पति ऊ बासा थे। उनके चार
Read Moreहैलो! अब आ जाओ । काँपती आवाज़ से प्रकम्पित मन, माँ के रूदन पर बहलाते स्वर, बिखरी मनोदशा, कातर हृदय,
Read Moreएक दिन निहार रही थीसुषमा चाँदनी की कानों में चुपके से कह गया चाँद –“तुम हो मेरी चाँदनी। “सकुचाई और
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