Author: बलविन्दर ‘बालम’

गीतिका/ग़ज़ल

महान साहित्यकार सुरजीत पातर को समर्पित ग़ज़ल

साहित्य का गुलज़ार बनाया पातर ने। एक अलग संसार बनाया पातर ने। सृजन वाली शक्ति भक्ति उस में थी, बिम्बों

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गीत/नवगीत

गीत

प्रतिभा-प्रतिष्ठा में प्राण। जाग उठा है हिन्दुस्तान।             ममता क्षमता समता प्रबल।             जैसे बहता निर्झर निर्मल।             स्वतंत्र-गणतंत्र की

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