ग़ज़ल
सच्चाई का ज़िक्र छिड़ा जब महफ़िल में। लोग बहुत से दिए दिखाई मुश्किल में। सिर्फ़ डुबोने की ही आदत है
Read Moreमहिलाओं की इज़्ज़त करने का, पाठ हमें पढ़ना होगा। हर कहीं सुरक्षित हो नारी, ऐसा समाज गढ़ना होगा। नारी कोई
Read Moreमैं काव्य जगत का इन्द्रधुनष।। जीवन में जितने रंग मिले, उन सबसे चित्र बनाये हैं। सच्चाई कहते सुनते भी, कुछ
Read More