मुक्तक
मूँद नयन हम स्वप्न देखते चित्र वो ऐसा हो।खुशबू से महका दे आँगन इत्र वो ऐसा हो।जिससे खुलकर बात करूंँ
Read Moreराजा ही जब डसने लगता।ज़हर उगल हँसने लगता। सर्पदंश दे काट रहा है।अलग शगूफे बांट रहा है।केवट की नैया में
Read Moreसकल विश्व की पीड़ा साथी मिलकर दूर भगानी है। अभिवादन का मंत्र पुराना ही हमको अपनाना है एक फासला बहुत
Read Moreअजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम। जनमानस के बीच में, नेता है बदनाम।। नेता है बदनाम, रात-दिन
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