मुक्तक
मन से अपने काम क्रोध का आओ हम कण कण फूंके।कुदृष्टि जो डाले उसके जीवन का हर क्षण फूंके।मृग रूपी
Read Moreराजा ही जब डसने लगता।ज़हर उगल हँसने लगता। सर्पदंश दे काट रहा है।अलग शगूफे बांट रहा है।केवट की नैया में
Read Moreसकल विश्व की पीड़ा साथी मिलकर दूर भगानी है। अभिवादन का मंत्र पुराना ही हमको अपनाना है एक फासला बहुत
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