चार दिन की जिंदगी
जीवन क्या है रास्तों पर भटकता राही,यहाँ सराय में ठहरा मुसाफिरचार दिन की जिंदगी,चार कंधों पर यूँ ही चले जाना
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Read Moreटूट गया स्वप्न,नींद जैसे खुलीअब नया करने की नई राह मिली,यह नया दौर है नये संकल्पों का तभी तो नई
Read More‘दर्द से तड़पती हुई एक बुढ़ी अम्मा सरकारी अस्पताल के एक पलंग पर बिमारी के कारण जोर जोर से चिल्ला
Read Moreहर जगह जहाँ भी देखो,दुनिया में लालच का खेल हैमतलब के इस जहाँ में,सब लालच में अपने-आपको लगाए हुए हैं।
Read More“भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ।” यही भाव हम सभी का होना चाहिए। राष्ट्रवाद के हिलोरे
Read Moreत्योहारों की खुशियों में सब शामिल हो जाओयह उल्लास, उमंगता जीवन में अनमोल होती है,आओ नव दीप जलाओ। संसार के
Read Moreतप-तप कर सोना बनता है,तपन जीवन के संघर्षों की कहानी हैसफलता इतनी आसानी से नहीं मिलती,सफलता के लिए बहुत परिश्रम
Read Moreगणेश उत्सव से समाजिक दायित्व के साथ राष्ट्र भक्ति की जो ज्योत प्रज्वलित कर आजादी से पहले स्वतंत्र वीर बालगंगाधर
Read Moreदर्द अपना हो या पराया,दर्द होता हैबहुत मुश्किलों में जीवन ज़ीना पड़ता हैकोशिश लाख कर ले ज़िन्दगी,पर हार नहीं मानता
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