मुक्तक/दोहा

मन में हो सद्भावना

मन में हो सद्भावना, अच्छे सोच विचार।
बोले मधुर बोल से, रखता शिष्टाचार।।
मानव पावन सा लगे, सच में देव समान।
सदा भले की सोचता, मन में नहीं गुमान।
द्वेष कपट को छोड़ के, सबका हित सम जान।
औरों के संकट हरे, अपना कर बलिदान।
गैर नहीं उस के लिए, सब से करता प्यार।
मन में हो सद्भावना, अच्छे सोच विचार।
सब के दिल को जीत ले, चले पकड़ कर हाथ।
दुख सुख का साथी बने, सदा ही रहता साथ।
राह दिखाए नेक की, जाग्रत करे विवेक।
रहता है निर्भीक वह, रहे सत्य की टेक।
प्रेम भाव में बाॅंध के, रखता है संसार।
मन में हो सद्भावना, अच्छे सोच विचार।
भेद भाव से हो रहित, रखता मेल मिलाप।
वचन निभाता है सदा, सब से पहले आप।
वैर नहीं दुश्मन नहीं, लगते सब हैं मीत।
सब से मिल के प्रेम से, गाता मीठे गीत।
मैल नहीं भीतर रहे, भागे मन से खार।
मन में हो सद्भावना, अच्छे सोच विचार।

— शिव सन्याल

*शिव सन्याल

नाम :- शिव सन्याल (शिव राज सन्याल) जन्म तिथि:- 2/4/1956 माता का नाम :-श्रीमती वीरो देवी पिता का नाम:- श्री राम पाल सन्याल स्थान:- राम निवास मकड़ाहन डा.मकड़ाहन तह.ज्वाली जिला कांगड़ा (हि.प्र) 176023 शिक्षा:- इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लोक निर्माण विभाग में सेवाएं दे कर सहायक अभियन्ता के पद से रिटायर्ड। प्रस्तुति:- दो काव्य संग्रह प्रकाशित 1) मन तरंग 2)बोल राम राम रे . 3)बज़्म-ए-हिन्द सांझा काव्य संग्रह संपादक आदरणीय निर्मेश त्यागी जी प्रकाशक वर्तमान अंकुर बी-92 सेक्टर-6-नोएडा।हिन्दी और पहाड़ी में अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। Email:. Sanyalshivraj@gmail.com M.no. 9418063995

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