गजल
कभी बाटाँ धर्म ने है कभी जाति में खो जाते क्यों हमारें रह्नुमाओं का, असर सब पर नजर आये कैसी
Read Moreकैसी सोच अपनी है किधर हम जा रहें यारों गर कोई देखना चाहें बतन मेरे बो आ जाये तिजोरी में
Read Moreउनको तो हमसे प्यार है ये कल की बात है कायम ये ऐतबार था ये कल की बात है जब
Read Moreअँधेरे में रहा करता है साया साथ अपने पर बिना जोखिम उजाले में है रह पाना बहुत मुश्किल ख्वाबों और
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