Author: *डॉ. निशा नंदिनी भारतीय

क्षणिका

क्षणिकाएँ- टूटते हुए घरों का सच

1.रिश्ते टूटे कहाँ हैं,हम टूटे हैंअहंकार के भार तलेप्रेम दबकर रह गया। 2.घर तो दीवारें हैं,टूटे हैं मनजिन्होंने संवाद छोड़

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