ग़ज़ल…….
कभी आँसुओं से नहा गयी, कभी मैं ख़ुशी से सँवर गयी|| तेरा प्यार फिर भी न पा सकी, मेरी उम्र
Read Moreआँखें ज़मीन में गढ़ाए, ठोढ़ी लगभग सीने में धसी हुई, एक पैर के अँगूठे से दूसरे पैर के अँगूठे के
Read Moreराम मिले सीता को जैसे , मुझको भी तुम मिल जाओ तोड़ धनुष को वरण करो तुम, राम मेरे तुम
Read Moreपति, बच्चे, नाती-पोते, रिश्तेदार, साहित्य और कार्यक्रम …कैसे एडजस्ट होता है ये सब? मैं अपने पति, सास-श्वसुर और छोटी बेटी
Read Moreदूर तक फैले समुंदर की तरह गोशे-गोशे में मेरे तुम ही समाये हो दिल करता है अब दिल से निकल
Read Moreनश्वरता … न करती प्रतीक्षा, न मुड़ती, देखती पीछे| क्षीण बड़ी ही लहरों की आयू| पल भर का बचपन, क्षणभर
Read Moreग़लती सारी नहीं दहेज़ मांगने वालों की कुछ तो ग़लती रही होगी उनकी भी जो लाड़-लाड़ में, दिखावे में लाद
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