कविता

सीप-सा घर

बूँद से जो छलके आँख सेaansu
कौन जाने ग़म के हैं
या हैं ख़ुशी के आँसू
थाम लिए हथेली पे
कौन जाने ग़ैर के हैं
या हैं उसी के आँसू
सीप-सा घर दे, मोती किये
कौन जाने नेकी हैं
या हैं बदी के आँसू

— डॉ पूनम माटिया

डॉ. पूनम माटिया

डॉ. पूनम माटिया दिलशाद गार्डन , दिल्ली https://www.facebook.com/poonam.matia poonam.matia@gmail.com