कविता

कविता

तुम काबिल बनो इतने कि ढलती उम्र के तकाज़ों में तुम गर्व का अनुभव करो। जो सपने तुम्हारी आँखें देखें, उन्हें पूरा करने को कई रातें जाग कर भी उनकी कीमत तुम भरो। जो बात तुम्हारे बाबा कहें, उन्हें सच करने की हर मुमकिन कोशिश तुम करो। जो तुम्हारी खामियों को कमजोर कर दें, उस […]

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सतत उपेक्षा

क्या होगा यदि किसी को उपेक्षित किया जाये हर बार? पहली बार में सूखेंगे आँसू उसके, दूसरी बार में वेदना संस्मरित होगी, तीसरी बार में फिर सूख जायेंगे मन के भाव।। उपेक्षा विरक्ति की जन्मदात्री है। जितना व्यक्ति उपेक्षित होता है, उतना ही वो पृथक करता जाता है स्वयं को स्वयं ही। यदि वास्तव में […]

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नयन मे चाहे चारों पहर नीर बहे

नयन मे चाहे चारों पहर नीर बहे, याद रहे कि वह नीर किसी को ना दिखे। जीवन तुम्हारे चरित्र से झलके, नसों से रिसता रुधिर कहीं न छलके। तुम जो हो, जिन पीडाओं को तुमने सहा, ईश्वर एक मात्र उसका साक्षी रहे। अपने हृदय की कुण्ठा का कमल तुम्हारे भीतर पनपा, वह ज्वालामुखी केवल तुम्हारे […]

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सुदृढ़ स्त्री

स्त्री जब अकेली पड़ जाती है, तब हो जाती है और भी अधिक कठोर। इतनी कठोर कि कोई भी उसके हृदय के भीतर झांकने से पहले सोचता है कई बार॥ जितनी ममता उसके वक्षस्थल में होती है, उससे कहीं अधिक वो अपने शब्दों कि निर्मम क़टार रखती है अपने कंठ के कृपाण में। क्यों कि […]

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कविता

एक उसके मिलने से हृदय पुलकित हो जाता था, मन का उपवन बाग़-बाग़ हो फूले नहीं समाता था। मैं वो थी जिसका नूर अम्बर को रिझाता था, मैं पलकें उठाती उससे पहले वो सामने नज़र आ जाता था। अब जीवन बेरंग है उसके बिना, अब रसों से विहीन है हृदय उसके बिना। मैं चाहूँ फिर […]

गीत/नवगीत

हार न जायें

मन जब अन्तर्द्वन्द से घिर जाये, तब हार न जायें जीवन में। हार न जायें जीवन में। कोयल सी वाणी जब कौए की भाँति कानों को चुभ जाये, हृदय की विदीर्णता पर जब कोई लेप न लगाये। टूटती आस जब बचाने को कोई हाथ पंख ना बन पाये, सफलता की राहों में जब शूल ही […]

कविता

परिवार

चाहे कोई कितना भी हो पास, चाहे तुम हो किसी के कितने भी खास। छोटी-बड़ी बातों को पल में जो भुला दे, वो परिवार ही होता है। टूटने लगे जब हर आस, छूटने लगे जब तन से साँस, फिर भी हर आवाज़ में तुम्हें पुकारे, उस पिता के साये में महकता हुआ वो परिवार ही […]

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शिव

जो आरम्भ है, अनादि है, सर्वश्रेष्ठ है, जो काल, कराल, प्रचंड है, जिनका स्वरूप अद्वितीय है, जिनका नाम ही सर्वस्व है, शिव है, सदा शिव है। मस्तक में जो चाँद सजाये, भस्म में जो रूप रमाये, गंगप्रवाह जो जटा मे धराये, मंथन को जो कण्ठ में बसाये, शिव है, सदा शिव है। वृषभ जिनका वाहन […]

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अब क्यों आए?

अब तुम आए हो..? जब प्रेम ही ना रहा शेष जो दृग देखते हैं, ऊपर ऊपर हरा भरा पुष्पित पल्लवित मधु प्रदेश अंतरचक्षु से देखो  , तो पाओगे!! निर्जन ,शुष्क ,परिवेश अब तुम आए हो..? जब प्रेम ही ना रहा शेष। शब्द हो गए हैं देखो श्रृंगारहीन मंन की काया हो चुकी  जीर्ण जर्जर और […]

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संयम

संयम एक ऐसी साधना है, जो हमें सब मुश्किलों से पार लगाने मे समर्थ है। हम अपने सुख के दिनों मे कभी ईश्वर से ये नहीं कहते कि तुम्हें मेरे हृदय की प्रसन्नता का आभास नहीं है। लेकिन दुख के दिनों मे हम प्रतिदिन उसे कोसते हैं कि तुम्हें मेरी तकलीफ का अंदाजा नहीं लग […]