Author: *डॉ. रूपचन्द शास्त्री 'मयंक'

मुक्तक/दोहा

नागपंचमी पर दोहे

श्रावण शुक्ला पञ्चमी, बहुत खास त्यौहार।नागपञ्चमी आज भी, श्रद्धा का आधार।1। महादेव ने गले में, धारण करके नाग।विषधर कण्ठ लगाय

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गीत/नवगीत

गीत “तुकबन्दी से होता गायन”

गीत “तुकबन्दी से होता गायन” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)—वाणी से खिलता है उपवनस्वर-व्यञ्जन ही तो है जीवन—शब्दों को मन में

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बाल कविता

“कागा जैसा मत बन जाना”

बालकविता “कागा जैसा मत बन जाना” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)ॉ—बारिश से भीगा है उपवनहरा हो गया धरती का तन—कोयल डाली-डाली डोलेलेकिन

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